नई रोजगार योजना वीबी-जी-राम-जी हिमाचल के हित में नहीं, केंद्र से संपर्क करेंगे: सीएम
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र की वीबी-जी-राम-जी योजना को हिमाचल विरोधी बताते हुए केंद्र सरकार से संपर्क करने की बात कही।
शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) के स्थान पर लागू की गई नई ग्रामीण रोजगार योजना 'वीबी-जी-राम-जी' (VB-G-RAM-G) को हिमाचल प्रदेश के हितों के खिलाफ बताया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस योजना के मौजूदा प्रावधानों को लेकर जल्द ही केंद्र सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगी।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि पूर्ववर्ती मनरेगा योजना पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा पोषित थी, जिससे पहाड़ी राज्य की आर्थिकी पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता था। 10 प्रतिशत राज्य अंशदान से बढ़ेगी वित्तीय कठिनाईमुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश जैसे विशेष श्रेणी के राज्यों को योजना के कुल खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करना होगा, जबकि अन्य राज्यों के लिए यह अनुपात 60:40 तय किया गया है।
"पहले से ही सीमित वित्तीय संसाधनों से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश पर इस 10% हिस्सेदारी के कारण सालाना लगभग ₹164 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। यदि काम की वास्तविक मांग बढ़ती है, तो यह बोझ ₹800 से ₹1,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।" - ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री इसके अलावा, नई नीति के तहत गैर-जनजातीय क्षेत्रों में मजदूरी दर ₹247 प्रतिदिन और जनजातीय क्षेत्रों में ₹309 तय की गई है, जिसे राज्य सरकार यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और महंगाई के लिहाज से बेहद कम मान रही है।
इंटरनेट कनेक्टिविटी और केंद्रीयकृत प्रणालियों पर चिंतामुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है जहां कई दूरदराज के गांवों में मोबाइल नेटवर्क की भारी समस्या है। ऐसे में नई योजना के तहत अनिवार्य किए गए जीपीएस-आधारित (GPS) मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जुड़े ऑनलाइन अप्रूवल जमीनी स्तर पर बड़ी बाधाएं खड़ी करेंगे। इससे स्थानीय ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता भी कम होगी। बैठक में विभाग की मजबूती के लिए रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने और चल रहे पंचायत घरों के निर्माण को पूरा करने के लिए ₹30 करोड़ जारी करने के भी निर्देश दिए गए।
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