प्रयागराज में मोहर्रम पर मजलिसों का दौर, कर्बला के शहीदों को किया याद
प्रयागराज में पहली मोहर्रम पर विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिसों का आयोजन हुआ, जहां अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को याद किया।
प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में माहे मोहर्रम की पहली तारीख को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की महान शहादत की याद में मजलिसों का दौर शुरू हो गया है। लगभग 1400 वर्ष बीत जाने के बाद भी कर्बला के शहीदों की याद में अकीदतमंदों का गम आज भी उतना ही ताजा है। इमाम हुसैन ने मानवता, हक और इंसाफ की खातिर कर्बला के मैदान में अपने पूरे खानदान को कुर्बान कर दिया था।
मोहर्रम की शुरुआत के साथ ही बक्शी बाजार स्थित ऐतिहासिक इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन में सालाना मजलिस का आयोजन किया गया, जिसे मौलाना अमिरुर रिज़वी ने संबोधित करते हुए कर्बला के वाकये पर रोशनी डाली। इसके अलावा जीरो रोड स्थित इमामबाड़ा डिप्टी जाहिद हुसैन में 10 दिवसीय अशरे की पहली मजलिस को मौलाना जमीर हैदर (इमाम-ए-जुमा, करारी कौशाम्बी) ने खिताब किया। वहीं, घंटाघर स्थित इमामबाड़ा सैयद मियां में मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी ने तकरीर की और रज़ा इस्माइल साफवी ने पूरदर्द मर्सिया पढ़ा।
प्रयागराज के विभिन्न मोहल्लों जैसे छोटी चक, गुड़ मंडी, मीरगंज, रानी मंडी, करेली, शाहगंज और दरियाबाद में सुबह से लेकर देर रात तक मजलिसों का सिलसिला चलता रहा। दरियाबाद स्थित अज़ाखाना सैयद फरहत अली में मजलिस के बाद इमाम हुसैन के वफादार घोड़े 'दुलदुल' का शबीह निकाला गया, जिसे गुलाब और चमेली के फूलों से सजाया गया था। अकीदतमंदों ने दुलदुल पर फूल-मालाएं चढ़ाकर मन्नतें मांगीं और दुआएं कीं। अंजुमन-ए-हाशिमिया के नौहाख्वानों ने जब दर्दभरे नौहे पढ़े, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया और हर आंख नम नजर आई। इस दौरान भारी संख्या में उलेमा और अकीदतमंद मौजूद रहे।
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