अयोध्या चोरी से सबक: हिमाचल के मंदिरों में लगेंगे डिजिटल टेंपर-प्रूफ दानपात्र
अयोध्या में हुई चोरी के बाद हिमाचल सरकार ने राज्य के सभी मंदिरों में टेंपर-प्रूफ दानपात्र लगाना अनिवार्य किया।
शिमला (हिमाचल प्रदेश) : अयोध्या के एक प्रसिद्ध मंदिर में हुई हालिया चोरी की घटना से सबक लेते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग (LAC) ने एक नया आधिकारिक आदेश जारी किया है, जिसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी नियंत्रण वाले और प्रमुख निजी मंदिरों में टेंपर-प्रूफ (छेड़छाड़-मुक्त) दानपात्र (Donation Boxes) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस नए सुरक्षा प्रोटोकॉल का मुख्य उद्देश्य मंदिरों में आने वाले चढ़ावे की चोरी को रोकना और सुरक्षा प्रणालियों को आधुनिक बनाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, पारंपरिक लकड़ी या साधारण लोहे के बक्सों की जगह अब अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों वाले दानपात्रों को शामिल किया जाएगा।
- टेंपर-प्रूफ डिजाइन: ये बक्से उच्च श्रेणी के स्टील से बने होंगे, जिन्हें कटर या साधारण औजारों से काटना या खोलना असंभव होगा।
- डिजिटल सेंसर: दानपात्रों में विशेष सेंसर और अलार्म सिस्टम लगे होंगे। यदि कोई इनके साथ अनधिकृत छेड़छाड़ करने की कोशिश करेगा, तो तुरंत अलार्म बज जाएगा और स्थानीय पुलिस को अलर्ट जाएगा।
- सीसीटीवी निगरानी: प्रत्येक दानपात्र को अनिवार्य रूप से हाई-डेफिनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरे की सीधी निगरानी में रखा जाएगा, जिसकी फीड सीधे मंदिर के कंट्रोल रूम से जुड़ी होगी।
"धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आस्था का संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अयोध्या की घटना के बाद हम किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं ले सकते। सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को एक महीने के भीतर इस आदेश को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।" - प्रशासनिक अधिकारी, हिमाचल सरकार
हिमाचल प्रदेश में माता चिंतपूर्णी, नैना देवी, बज्रेश्वरी देवी और ज्वालामुखी जैसे कई ऐतिहासिक और समृद्ध मंदिर हैं, जहां सालाना करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। नए टेंपर-प्रूफ बॉक्स आने से न केवल चोरी की वारदातों पर पूरी तरह लगाम लगेगी, बल्कि चढ़ावे की गिनती और ऑडिट प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी हो सकेगी। जिला प्रशासनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षा ऑडिट टीम के जरिए नियमित रूप से इन धार्मिक स्थलों का निरीक्षण करें। इस फैसले का मंदिर ट्रस्टों और स्थानीय पुजारियों ने भी स्वागत किया है
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