राज्यपाल ने सरदार पटेल के एकता और मजबूत संघवाद के विजन को सराहा
राज्यपाल ने राजभवन में आयोजित व्याख्यान में सरदार वल्लभभाई पटेल के एकता, अखंडता और संघवाद के विजन पर प्रकाश डाला।
शिमला (हिमाचल प्रदेश ): हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने राजभवन में आयोजित 'लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल: राष्ट्रीय एकता और आधुनिक संघवाद' विषय पर एक विशेष व्याख्यानमाला को संबोधित किया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने भारत के प्रथम गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदानों को याद किया। उन्होंने कहा कि आज हम जिस अखंड भारत में सांस ले रहे हैं, उसकी नींव सरदार पटेल के दृढ़ संकल्प, अद्वितीय कूटनीति और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट विजन पर टिकी हुई है।
राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि सरदार पटेल का विजन केवल भौगोलिक एकीकरण तक सीमित नहीं था, बल्कि वे एक ऐसे सहकारी संघवाद (को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म) के पक्षधर थे जहां केंद्र और राज्य मिलकर देश को आगे बढ़ाएं।
562 रियासतों का ऐतिहासिक विलय एक चमत्कार
राज्यपाल ने अपने भाषण में युवा पीढ़ी को इतिहास के पन्नों से रूबरू कराते हुए बताया कि आजादी के समय देश को खंडित करने की कई बाहरी और आंतरिक साजिशें रची जा रही थीं।
"आजादी के तुरंत बाद बिना किसी बड़े रक्तपात के 562 से अधिक देसी रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराना इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार था। यदि सरदार पटेल ने वह दृढ़ता न दिखाई होती, तो आज भारत का नक्शा कुछ और ही होता।" - शिव प्रताप शुक्ल, राज्यपाल
सिविल सर्विसेज को 'स्टील फ्रेम' बनाने का श्रेय
राज्यपाल ने प्रशासनिक सुधारों में सरदार पटेल की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) को देश का 'स्टील फ्रेम' कहा था। उनका मानना था कि एक निष्पक्ष, मजबूत और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली नौकरशाही ही देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रख सकती है।
उन्होंने आज के योजनाकारों और प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की कि वे नीतियों का निर्माण करते समय सरदार पटेल के अंत्योदय और राष्ट्र-प्रथम के सिद्धांतों को अवश्य ध्यान में रखें। संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, इतिहासकारों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भाग लिया और भारत निर्माण में पटेल के विचारों की प्रासंगिकता पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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