हिमाचल का 'ग्रीन टू गोल्ड' मिशन: नौणी विश्वविद्यालय में भांग अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित
डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय ने भांग अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की; हिमाचल के 'ग्रीन टू गोल्ड' मिशन को मिलेगी नई गति।
शिमला (हिमाचल प्रदेश) : हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने राज्य के महत्वाकांक्षी 'ग्रीन टू गोल्ड' (Green to Gold) मिशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने आधिकारिक तौर पर भांग (Cannabis) की खेती और उसके औद्योगिक उपयोग पर गहन शोध करने के लिए एक अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशाला (Research Lab) की स्थापना की है। यह पहल न केवल वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को बदलने में भी सहायक सिद्ध होगी।
मिशन 'ग्रीन टू गोल्ड' के पीछे का उद्देश्य
हिमाचल सरकार ने औषधीय और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती को विनियमित करने का निर्णय लिया है। इस प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य भांग के ऐसे किस्मों (Varieties) को विकसित करना है जिनमें नशीले पदार्थों (THC) की मात्रा न्यूनतम हो और फाइबर, बीज व औषधीय गुणों (CBD) की मात्रा अधिकतम हो।
आर्थिक सशक्तिकरण: भांग के रेशों से कपड़ा, कागज, बायो-प्लास्टिक और स्वास्थ्यवर्धक तेल बनाने की तकनीक पर यहां विशेष काम होगा, जिससे किसानों की आय में कई गुना वृद्धि होने की उम्मीद है।
वैज्ञानिक निगरानी: विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अब बीज से लेकर फसल कटाई तक की पूरी प्रक्रिया का डेटा एकत्र करेंगे, ताकि राज्य सरकार को एक मजबूत नीति बनाने में मदद मिल सके।
रोजगार के अवसर: इस उद्योग के बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को प्रसंस्करण इकाइयों (Processing units) के माध्यम से नए रोजगार मिलेंगे।
"यह प्रयोगशाला भांग के वैज्ञानिक और औद्योगिक पहलुओं को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी। हमारा उद्देश्य भांग को एक 'नशीले पदार्थ' की छवि से बाहर निकाल कर इसे राज्य की आर्थिक समृद्धि के एक मुख्य साधन के रूप में स्थापित करना है।" - कुलपति, नौणी विश्वविद्यालय
भविष्य की संभावनाएं
इस अनुसंधान का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब भांग की खेती पूरी तरह से कानून के दायरे में और वैज्ञानिक देखरेख में होगी। राज्य सरकार ने इस परियोजना को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ चुनिंदा जिलों में शुरू करने की योजना बनाई है। नौणी विश्वविद्यालय की यह नई लैब न केवल हिमाचल के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए भांग आधारित उद्योगों का मॉडल बनकर उभरेगी।
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