लिप्पा गांव को खतरा, हाईकोर्ट ने किन्नौर डीसी को व्यक्तिगत रूप से किया तलब
हिमाचल हाईकोर्ट ने किन्नौर के लिप्पा गांव को खतरा पैदा करने वाले नाले की सफाई में देरी पर डीसी को तलब किया है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने किन्नौर जिले के संवेदनशील लिप्पा गांव को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए स्थानीय नाले (खड्ड) को साफ करने में प्रशासनिक सुस्ती पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस मामले में लापरवाही बरतने पर किन्नौर के उपायुक्त (डीसी) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश जारी किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने लिप्पा गांव के निवासियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त रुख अपनाया। ग्रामीणों ने अपनी याचिका में चिंता जताई थी कि गांव के पास बहने वाले स्थानीय नाले में भारी मात्रा में मलबा, बोल्डर और गाद जमा हो चुकी है। मानसून की भारी बारिश के दौरान इस मलबे के कारण नाले का पानी ब्लॉक होकर पूरे गांव में तबाही मचा सकता है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जिला प्रशासन ने इस मलबे को हटाने के लिए समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
हाईकोर्ट ने इस देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील माने जाने वाले किन्नौर जिले में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने किन्नौर के उपायुक्त को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि नाले की सफाई का काम अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया और इस दिशा में क्या आपातकालीन कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने प्रशासन को तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू करने और इसकी प्रगति रिपोर्ट भी कोर्ट के समक्ष पेश करने का हुक्म दिया है।
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