शिमला रोपवे परियोजना के री-टेंडर की तैयारी, कैबिनेट से जल्द मिल सकती है मंजूरी
हिमाचल प्रदेश सरकार ₹2,980 करोड़ की महत्वाकांक्षी शिमला रोपवे परियोजना के लिए जल्द ही नया वैश्विक टेंडर जारी करने जा रही है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में यातायात की गंभीर समस्या से निपटने के लिए तैयार की गई महत्वाकांक्षी हवाई रोपवे परियोजना (Aerial Ropeway Project) को जल्द ही नया जीवन मिलने की उम्मीद है。 प्रदेश सरकार इस परियोजना के लिए दोबारा निविदाएं (Re-tender) आमंत्रित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है。 सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में तैयार किए गए नए प्रस्ताव को आगामी राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।लगभग ₹2,980 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस 13.65 किलोमीटर लंबी रोपवे परियोजना का भविष्य इस साल मई से अधर में लटका हुआ था, जब सिंगल टेंडर (इकलौती बोली) आने और लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण कैबिनेट ने तत्कालीन निविदा को रद्द कर दिया था。 सरकार ने पहले इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मोड पर चलाने का फैसला किया था। परिवहन विभाग का जिम्मा संभाल रहे उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने संकेत दिए हैं कि शिमला शहर को पर्यावरण-अनुकूल परिवहन समाधान देने, ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या से निजात दिलाने के लिए री-टेंडरिंग बेहद जरूरी है。 इसके अलावा, वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग भी करेगी। हिमाचल प्रदेश रोपवे कॉर्पोरेशन द्वारा परिकल्पित यह परियोजना पूरी होने के बाद बोलीविया के ला पाज़ नेटवर्क के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शहरी रोपवे प्रणाली बन जाएगी。 यह सिस्टम तारा देवी, आईएसबीटी, ओल्ड बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सचिवालय जैसे 12 प्रमुख केंद्रों को जोड़ेगा और हर घंटे दोनों दिशाओं में 3,000 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा。
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