हिमाचल में नट मिशन से बदलेगी बागवानी, किसानों को होगा दोगुना लाभ
हिमाचल के मुख्यमंत्री ने नट मिशन का किया शुभारंभ, अखरोट और बादाम की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय।
शिमला (हिमाचल प्रदेश) : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्य में बागवानी क्षेत्र को नई ऊंचाइयां देने के लिए महत्वाकांक्षी 'नट मिशन' (Nut Mission) की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट, बादाम और अन्य सूखे मेवों (Nuts) की उत्पादकता को बढ़ाना और किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है। सरकार का मानना है कि यह मिशन आने वाले वर्षों में बागवानों के लिए आय का सबसे बड़ा स्रोत बनेगा।
मुख्यमंत्री ने सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि पारंपरिक खेती की तुलना में नट-आधारित बागवानी अधिक लाभदायक है। राज्य सरकार ने इस मिशन के तहत निम्नलिखित लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया है:
उच्च गुणवत्ता वाले पौधे: सरकार विदेश से उन्नत किस्म के अखरोट और बादाम के पौधे आयात करेगी, जो कम समय में अधिक पैदावार देने में सक्षम होंगे।
वैज्ञानिक तकनीक: बागवानों को आधुनिक ग्राफ्टिंग और कटाई-छंटाई की तकनीकें सिखाई जाएंगी ताकि फसल की गुणवत्ता वैश्विक मानकों के अनुरूप हो सके।
बेहतर मार्केटिंग: उत्पादित सूखे मेवों की बिक्री के लिए एक संगठित सप्लाई चेन तैयार की जाएगी, जिससे बिचौलियों का सफाया होगा और सीधे मुनाफे का बड़ा हिस्सा किसानों की जेब में जाएगा।
"नट मिशन केवल एक परियोजना नहीं है, बल्कि यह हमारे बागवानों की समृद्धि का मार्ग है। हम हिमाचल को सूखे मेवों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाकर इसे देश का 'नट हब' बनाना चाहते हैं।" - मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
रोजगार के नए द्वार
यह मिशन न केवल किसानों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि प्रसंस्करण इकाइयों (Processing Units) की स्थापना से स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिलेगा। सरकार ने इस मिशन के लिए सब्सिडी के प्रावधान भी किए हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी इस लाभदायक खेती से जुड़ सकें। आगामी पांच वर्षों में राज्य सरकार ने हजारों हेक्टेयर भूमि को नट बागवानी के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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