बघाट बैंक ने परिसमापन से बचने के लिए सरकार से मांगी २५ करोड़ की वित्तीय मदद
हिमाचल प्रदेश के बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक ने डूबने से बचने के लिए राज्य सरकार से २५ करोड़ रुपये का बेलआउट पैकेज मांगा।
सोलन: हिमाचल प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सहकारी वित्तीय संस्थानों में से एक, बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक (Baghat Urban Co-operative Bank) इस समय गहरे वित्तीय संकट से जूझ रहा है। बैंक प्रबंधन ने खुद को पूरी तरह दिवालिया होने और परिसमापन (liquidation) की प्रक्रिया से बचाने के लिए राज्य सरकार से तत्काल ₹२५ करोड़ के वित्तीय पैकेज (lifeline) की गुहार लगाई है। लगातार बढ़ते गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) और खराब ऋण प्रबंधन के कारण बैंक की वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक हो गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंक की वित्तीय सेहत को लेकर जारी सख्त चेतावनियों के बाद यह कदम उठाया गया है। बघाट बैंक के निदेशक मंडल और शीर्ष अधिकारियों ने शिमला में सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों के साथ एक आपातकालीन बैठक की। बैठक में बैंक को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक टर्नअराउंड योजना (Turnaround Plan) प्रस्तुत की गई, जिसके तहत इस ₹२५ करोड़ की राशि का उपयोग बैंक के पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) को सुधारने में किया जाएगा।
यदि राज्य सरकार इस बेलआउट पैकेज को मंजूरी नहीं देती है, तो केंद्रीय बैंक (RBI) इसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर सकता है, जिससे सोलन और आसपास के क्षेत्रों के हजारों खाताधारकों, छोटे व्यापारियों और जमाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई संकट में पड़ जाएगी। बैंक प्रबंधन ने सरकार को आश्वासन दिया है कि वित्तीय सहायता मिलने पर वे अगले दो वर्षों में कड़े ऋण वसूली अभियान के माध्यम से बैंक को वापस पटरी पर ले आएंगे।
सहकारिता विभाग के सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है, क्योंकि बैंक का डूबना सहकारिता आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका होगा। हालांकि, सरकार इस पैकेज को देने से पहले बैंक के कामकाज की विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट और जवाबदेही तय करने की शर्त रख सकती है। स्थानीय खाताधारक भी इस स्थिति से चिंतित हैं और सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
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