कांगड़ा में बन रहा 'दुर्गेश अरण्य' देश का पहला आईजीबीसी प्रमाणित इको-जू बनेगा
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में बन रहा दुर्गेश अरण्य जूलॉजिकल पार्क भारत का पहला पर्यावरण-अनुकूल आईजीबीसी प्रमाणित इको-जू होगा।
धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत बनखंडी में बन रहा 'दुर्गेश अरण्य अंतर्राष्ट्रीय जूलॉजिकल पार्क' देश में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन की परिभाषा को बदलने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि यह महत्वाकांक्षी पार्क पर्यावरण और सतत बुनियादी ढांचे के लिए इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) से प्रमाणन प्राप्त करने वाला भारत का पहला चिड़ियाघर बनेगा।
कुल ₹६१९ करोड़ की अनुमानित लागत से २३३.५ हेक्टेयर वन भूमि पर विकसित हो रहा यह पार्क पारंपरिक पिंजरों के बजाय प्राकृतिक और विशाल बाड़ों (enclosures) पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) ने इसके 'वन वैभव पथ' और 'बायोडायवर्सिटी कोर्ट' में ३४ बाड़े बनाने की मंजूरी दे दी है।
यहाँ एशियाई शेर, हॉग डियर, मगरमच्छ, घड़ियाल और विभिन्न देशी-विदेशी पक्षियों सहित कुल ७३ प्रजातियों को प्राकृतिक आवास प्रदान किया जाएगा। इस चिड़ियाघर की सबसे बड़ी विशेषताओं में एक 'नोक्टर्नल हाउस' (Nocturnal House) शामिल है, जहाँ पर्यटक रात में सक्रिय रहने वाली बिल्ली प्रजातियों को देख सकेंगे। साथ ही, जलीय पक्षियों के लिए एक प्राकृतिक 'वेटलैंड एवियरी' का निर्माण भी किया जा रहा है।
परियोजना का पहला चरण २५ हेक्टेयर क्षेत्र में ₹२३० करोड़ की लागत के साथ अंतिम चरणों में है, जबकि पूरा प्रोजेक्ट मार्च २०२७ तक तैयार होने की उम्मीद है। हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यहाँ १ मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र और ३ करोड़ लीटर क्षमता का जल संचयन ढांचा भी तैयार किया जा रहा है। यह पार्क कांगड़ा को राज्य की 'पर्यटन राजधानी' के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
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