मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बोले- बीबीएमबी बकाया चुकाने पर ही हरियाणा को मिलेगा किशाऊ परियोजना में सहयोग

हिमाचल के मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि हरियाणा द्वारा बीबीएमबी बकाया राशि चुकाने के बाद ही किशाऊ परियोजना पर काम बढ़ेगा।

Jul 14, 2026 - 17:33
Updated: 3 hours ago
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बोले- बीबीएमबी बकाया चुकाने पर ही हरियाणा को मिलेगा किशाऊ परियोजना में सहयोग

शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अंतर-राज्यीय जल और बिजली विवादों पर एक बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट घोषणा की है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ४२२ मेगावाट की महत्वाकांक्षी किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) पर तभी आगे बढ़ेगी, जब हरियाणा सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के लंबित एरियर में अपने हिस्से के भुगतान को लेकर स्पष्ट सहमति देगी और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक शपथ-पत्र (Affidavit) दायर करेगी।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस गंभीर वित्तीय और रणनीतिक गतिरोध को लेकर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से फोन पर विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय हस्तक्षेप की मांग की। सुक्खू ने दोटूक शब्दों में कहा कि एक तरफ हिमाचल प्रदेश के जायज हक और दावों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, और दूसरी तरफ नए अंतर-राज्यीय प्रोजेक्ट्स में सहयोग की उम्मीद रखना पूरी तरह अनुचित है।

हिमाचल सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने याद दिलाया कि लगभग १५ साल पहले देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने बीबीएमबी परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की ७.१९ प्रतिशत हिस्सेदारी और उससे मिलने वाले लाभों को वैध माना था। इसके बावजूद, पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा के असहयोग के कारण हिमाचल पिछले एक दशक से अधिक समय से अपने हिस्से की १३,०६६ मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़े भारी वित्तीय लाभों से वंचित है।  

वर्तमान में सुक्खू सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत लगभग ₹४,२०० करोड़ के इस लंबित एरियर को वसूलने के लिए हर स्तर पर कानूनी और प्रशासनिक दबाव बना रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष २०२३ में उनकी सरकार ने किशाऊ परियोजना के पुराने और घाटे वाले समझौते को खारिज कर दिया था। राज्य सरकार के कड़े और दृढ़ रुख के कारण अब हिमाचल प्रदेश को बिना किसी वित्तीय निवेश के इस परियोजना से सालाना लगभग ₹६०० करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा, जो राज्य के वित्तीय हितों की एक बड़ी जीत है।  

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