अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में २४ घंटे के भीतर आएगी एसआईटी रिपोर्ट

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी अगले २४ घंटे के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप सकती है।

Jul 16, 2026 - 17:04
Updated: 3 hours ago
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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में २४ घंटे के भीतर आएगी एसआईटी रिपोर्ट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रसिद्ध श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में एक बड़ा मोड़ आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) अगले २४ घंटे के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को सौंप सकता है। चूंकि एसआईटी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और इसे आगे बढ़ाने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए जांच टीम रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है।  

लखनऊ के संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में बनी इस एसआईटी ने मंदिर केOperational Arrangement (संचालन व्यवस्था) और दान प्रबंधन में गंभीर खामियां पाई हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा के तय मानक संचालन नियमों (SOPs) का ठीक से पालन नहीं किया गया, जिससे चोरों को मौका मिला। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर दान राशि की गिनती करने वाले कर्मचारियों द्वारा नोटों के बंडल कपड़ों, जूतों और जेबों में छिपाने के लगभग ७० से अधिक मामले सामने आए हैं।  

मामले के मुख्य निष्कर्ष और कार्रवाई:बिना नियमों के भर्ती: एसआईटी ने पाया कि चढ़ावे की गिनती करने वाले स्टाफ की भर्ती नियमों को ताक पर रखकर केवल ट्रस्ट के अधिकारियों की सिफारिश पर की गई थी।  भारी नकदी बरामदगी: पुलिस और एसआईटी ने छापेमारी कर अब तक आरोपियों के ठिकानों से लाखों रुपये की चोरी की नकदी बरामद की है।बड़े चेहरों पर संदेह: रिपोर्ट में ट्रस्ट के कुछ महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों और उनके करीबियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिनके पास बिना किसी आधिकारिक पद के भी दान पेटियों (हुंडियों) की चाबियां और असीमित पहुंच थी।

इस मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी कड़ा संज्ञान लिया है और राज्य सरकार से बंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस अंतिम रिपोर्ट के आने के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव और एक नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।  

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