मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किशाऊ जलविद्युत परियोजना के एमओयू पर अधिकारियों संग की बैठक
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में होने वाले किशाऊ बांध परियोजना समझौते की समीक्षा की।
शिमला: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की संयुक्त महत्वाकांक्षी ६६० मेगावाट की किशाऊ बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में जल्द ही हस्ताक्षरित होने वाले संशोधित समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतिम मसौदे और रणनीतिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करना था।
टोंस नदी पर बनने वाली यह अंतर-राज्यीय परियोजना राष्ट्रीय महत्व की घोषित है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समझौते में हिमाचल प्रदेश के वित्तीय और बिजली अधिकारों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाए। इस परियोजना के निर्माण से न केवल ६६० मेगावाट पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन होगा, बल्कि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित छह उत्तर भारतीय राज्यों को पेयजल और सिंचाई के लिए भारी मात्रा में पानी भी उपलब्ध कराया जाएगा।
परियोजना की अनुमानित लागत का लगभग ९० प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग और ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से कहा कि विस्थापित होने वाले स्थानीय परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की नीतियों को बेहद मानवीय और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि परियोजना से मिलने वाली मुफ्त बिजली और लाभांश का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर हिमाचल प्रदेश के राजस्व को मजबूत करने में उपयोग हो।
बैठक में मुख्य सचिव और ऊर्जा सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री को उत्तराखंड सरकार और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ चल रही तकनीकी वार्ता की प्रगति से अवगत कराया। सुक्खू ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री की मौजूदगी में होने वाला यह अंतिम समझौता दशकों से लंबित इस विशाल परियोजना को धरातल पर उतारने में मील का पत्थर साबित होगा।
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