अंतर्मन की गहराई में जाने से चित्त शुध्दि होती है  तब कार्य सिध्द होता है:जयेश भाई 

सबल नंदिनी शिविर के उद्घाटन सत्र में  जयेश भाई ने कहा कि हमें दृढता और विनम्रता की साधना करना है। आज समाज और देश में बहुत-सी प्रवृत्तियां चल रही हैं। इससे समाज का थोडा बहुत भला होता है। लेकिन इससे समाधान नहीं होता। ऊँकार मुख्य कारण उसमें आध्यात्मिक तत्व का अभाव होना है। सेवा कार्य में भक्ति और अध्यात्म को दाखिल करने का मार्ग विनोबा ने सुझाया।

Sep 12, 2023 - 13:20
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अंतर्मन की गहराई में जाने से चित्त शुध्दि होती है  तब कार्य सिध्द होता है:जयेश भाई 
अंतर्मन की गहराई में जाने से चित्त शुध्दि होती है  तब कार्य सिध्द होता है:जयेश भाई 

आर एल पाण्डेय

अहमदाबाद। सबल नंदिनी शिविर के उद्घाटन सत्र में  जयेश भाई ने कहा कि हमें दृढता और विनम्रता की साधना करना है। आज समाज और देश में बहुत-सी प्रवृत्तियां चल रही हैं। इससे समाज का थोडा बहुत भला होता है। लेकिन इससे समाधान नहीं होता। ऊँकार मुख्य कारण उसमें आध्यात्मिक तत्व का अभाव होना है। सेवा कार्य में भक्ति और अध्यात्म को दाखिल करने का मार्ग विनोबा ने सुझाया।

उन्होंने अपने जीवन में समग्र को अपनाया। श्री जयेश भाई ने कहा कि बहुत बार हम मन और बुध्दि के स्तर पर कार्य करके संतुष्ट हो जाते हैं। हमें इसके आगे प्रज्ञा और विवेक को पार कर आत्म तत्व का स्पर्श करने की आवश्यकता है। श्री जयेश भाई ने अपनी जापान यात्रा के अनुभव बताते हुए कहा कि वहां पर प्रत्येक क्रिया में कृतज्ञता का भाव है। अनेक संकटों को जापानियों ने जितने धैर्य से सहन किया है, वह दुनिया के लिए मिसाल है। मृत्यु को प्राप्त हो जाने के बाद परिवारजनों द्वारा लाखों की संख्या में पौधे लगाए गये हैं। स्मृति को चिरस्थायी करने का यह अनूठा उदाहरण है।

श्री जयेश भाई ने कहा कि हमने वह दौर भी देखा है जब सामाजिक कार्य को लेकर बहुत सारे आक्षेप लगाए गये, लेकिन मौन रहकर सेवा का परिणाम आज दिखायी देता है। इसमे मैत्री भाव ने बहुत सहायता की। श्री जयेश भाई ने गौतम बुध्द का उदाहरण देते हुए कहा कि करुणा दृष्टि के बिना मैत्री की साधना कठिन है। इसके साथ सत्य और प्रेम आ ही जाता है। विनोबा ने अपने जीवन में सत्य, प्रेम और करुणा की साधना की। उन्हें भौतिक रूप से भूमि दान में मिली और आध्यात्मिक दृष्टि से समाज में करुणा का बीजारोपण हुआ। श्री जयेश भाई ने कहा कि प्रवृत्ति से बहुत अधिक बात बनती नहीं है, बल्कि कार्य में गहराई होना चाहिए। अंतर्मन की गहराई में जाने से चित्त शुध्दि होती है  तब कार्य सिध्द होता है। सामूहिक साधना में चित्त शुध्दि का स्थान महत्वपूर्ण है। इस चित्त शुध्दि में सफाई कार्य एक आलंबन है, जिससे अहंकार का निरसन होता है।

इसके पूर्व सुघड में स्थापित विनोबा जी और महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने प्राकृतिक वस्तुओं से रंगोली बनायी गयी। फिल्म डिविजन द्वारा विनोबा जी पर बनाए गये वृत्त चित्र का प्रदर्शन किया गया। द्वितीय सत्र में सभी प्रतिभागियों ने अपना परिचय दिया। सबल नंदिनी शिविर में गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश झारखंड बिहार  माधप्रदेश   राजस्थान   उत्तराखंड के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। दोपहर के बाद के सत्र में महराजा रणजीत सिंह कालेज इंदौर के प्रोफेसर डा पुष्पेंद्र दुबे ने विनोबा जी की शांतिसेना सर्वोदय पत्र  खादी मिशन, आचार्य कुल जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। ऋषिकेश के संत सिद्धार्थ कृष्ण ने अपनी बात कहते हुए बताया कि मैत्री का प्रयोग  बुद्ध भगवान के समय से हुआ।

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